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ईरान-अमेरिका तनाव से हिला बाजार, 700 अंक गिरा सेंसेक्स फिर ऐसे लौटा पटरी पर!

Reported by Pushkar Shahi and edited by Pushkar Shahi

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव की खबरों के बीच निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजार ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ घरेलू निवेशकों की खरीदारी और आईटी सेक्टर के दमदार प्रदर्शन ने बाजार को संभाल लिया।

सोमवार, 13 जुलाई को बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 700 से ज्यादा अंक टूट गया और 76,857.43 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी-50 भी गिरावट के साथ 24,039.40 के स्तर पर खुला। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल की आशंका के कारण देखने को मिला।

होर्मुज संकट की खबर से बढ़ी बाजार की चिंता

दरअसल, ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आई खबरों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक है। इसके प्रभावित होने की आशंका से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी और निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी।

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत पर दबाव आने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ाई।

गिरावट के बाद बाजार ने दिखाई मजबूती

हालांकि, शुरुआती झटके के बाद बाजार ने तेजी से रिकवरी की। दोपहर तक सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी ज्यादातर गिरावट को कम कर लिया। सेंसेक्स लगभग स्थिर होकर 77,626 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी-50 भी 24,200 के करीब पहुंच गया।

बाजार में आई इस वापसी के पीछे घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और मजबूत कॉरपोरेट नतीजों ने अहम भूमिका निभाई। निवेशकों ने गिरावट के दौरान कई अच्छे शेयरों में खरीदारी का मौका तलाशा, जिससे बाजार को सहारा मिला।

IT सेक्टर बना बाजार का बड़ा सहारा

सोमवार के कारोबार में आईटी कंपनियों ने बाजार को संभालने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 3.6 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।

दिग्गज आईटी कंपनी टीसीएस के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई। वहीं, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। आईटी शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार के गिरते रुख को पलटने में मदद की।

इन सेक्टरों पर बना रहा दबाव

हालांकि, बाजार की रिकवरी सभी सेक्टरों में देखने को नहीं मिली। वैश्विक मांग को लेकर चिंता के चलते मेटल शेयर दबाव में रहे। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली।

निवेशकों ने ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत मजबूत कंपनियों की ओर रुख किया। यही वजह रही कि कुछ सेक्टरों में गिरावट जारी रही, जबकि आईटी और चुनिंदा बड़े शेयरों ने बाजार को संभाला।

निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

बाजार की आगे की दिशा अब कई अहम घटनाओं पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा फैक्टर ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति होगी। अगर तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए हैं। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को मजबूती देने वाला संकेत माना जा रहा है।

आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?

विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,800 से 24,300 का स्तर महत्वपूर्ण बना हुआ है। 24,250 के ऊपर मजबूत बंद होने पर बाजार में फिर तेजी लौट सकती है, जबकि 23,900 के नीचे फिसलने पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

फिलहाल निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बाजारों के रुख पर नजर रखनी होगी। सोमवार का कारोबार यह दिखाता है कि वैश्विक संकट के बीच भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर बढ़ सकता है, लेकिन मजबूत घरेलू कंपनियां और संस्थागत खरीदारी बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल बाजार की जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ वित्तीय सलाह जरूर लें।

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